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अमित शाह का संसद में तीखा हमला: ऑपरेशन सिंदूर और महादेव पर दी जानकारी, कांग्रेस पर भी किया करारा वार

July 29, 2025 | by Nitesh Sharma

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LIvekhabhar | Chhattisgarh News

केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने लोकसभा में ‘ऑपरेशन सिंदूर’ पर बोलते हुए स्पष्ट किया कि इस ऑपरेशन के तहत जो तीन आतंकी मारे गए, वे पहलगाम हमले में शामिल थे। उन्होंने बताया कि सुरक्षा एजेंसियों ने पूरी रणनीति के साथ आतंकियों को पाकिस्तान भागने से रोका और उनकी घाटी में मौजूदगी की पुष्टि के बाद ऑपरेशन को अंजाम दिया गया।

शाह ने संसद में बताया कि ‘ऑपरेशन महादेव’ में मारे गए आतंकवादी—सुलेमान उर्फ फैजल, अफगान और जिब्रान—लश्कर-ए-तैयबा के ए श्रेणी के आतंकी थे। इनमें से सुलेमान पहलगाम और गगनगिर हमलों में शामिल था। उन्होंने कहा कि इस ऑपरेशन में सेना, सीआरपीएफ और जम्मू-कश्मीर पुलिस ने मिलकर अद्भुत समन्वय दिखाया, जिसके लिए पूरा देश उनका आभारी है।

22 अप्रैल को हुए हमले के बाद तुरंत उच्चस्तरीय बैठक की गई, जिसमें तय हुआ कि आतंकियों को किसी भी हाल में पाकिस्तान भागने नहीं देना है। इसके लिए 3000 घंटे से अधिक पूछताछ की गई और 1055 लोगों से जानकारी जुटाई गई। दो स्थानीय मददगारों की गिरफ्तारी के बाद ऑपरेशन महादेव को 22 जुलाई को अंजाम दिया गया।

शाह ने विपक्ष के सवालों का जवाब देते हुए कहा कि मारे गए आतंकियों के पाकिस्तान से होने के पर्याप्त सबूत हैं। इनमें से दो के पास पाकिस्तान के वोटर आईडी नंबर, पाकिस्तानी चॉकलेट्स और हथियार भी मिले हैं। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि आतंकियों की मौत पर भी विपक्ष का चेहरा बुझा हुआ था।

गृहमंत्री ने बताया कि भारत ने हाल ही में पाकिस्तान के अंदर घुसकर 100 किलोमीटर दूर नौ आतंकी ठिकानों को तबाह किया। इस ऑपरेशन में कोई नागरिक हताहत नहीं हुआ, सिर्फ आतंकवादियों को निशाना बनाया गया। इसमें मसूद अजहर का बहनोई, मुदस्सर खादियान और याकूब मलिक जैसे खूंखार आतंकी मारे गए।

शाह ने कहा कि पाकिस्तान को संघर्ष विराम की अपील करनी पड़ी क्योंकि भारत की जवाबी कार्रवाई से उसकी कमर टूट गई थी। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि 10 मई को पाकिस्तान के DGMOs ने भारत से फोन कर संघर्षविराम की गुहार लगाई।

शाह ने नेहरू से लेकर मनमोहन सिंह सरकार तक कांग्रेस की नीतियों की आलोचना की। उन्होंने कहा:

  • 1948: जब हमारी सेना कश्मीर में मजबूत स्थिति में थी, तब नेहरू ने युद्ध विराम घोषित किया।

  • 1960: सिंधु जल संधि में भारत ने 80% पानी पाकिस्तान को दे दिया।

  • 1965: हाजी पीर पर कब्जे के बाद उसे लौटाया गया।

  • 1971: 93 हजार पाकिस्तानी युद्धबंदियों और 15 हजार वर्ग किमी ज़मीन के बावजूद पीओके की मांग नहीं की गई।

  • 2004: मनमोहन सरकार ने सत्ता में आते ही आतंक विरोधी ‘पोटा’ कानून को रद्द कर दिया।

“अगर आज पीओके अस्तित्व में है, तो उसकी जिम्मेदारी पंडित नेहरू की है,” शाह ने कहा। उन्होंने कांग्रेस पर वोट बैंक की राजनीति के लिए आतंकियों को बचाने का आरोप लगाया।

अमित शाह ने संसद में ‘ऑपरेशन सिंदूर’ और ‘महादेव’ की सफलता की जानकारी देते हुए विपक्ष को आड़े हाथों लिया। उन्होंने पाकिस्तान पर भारत की सैन्य सफलता को रेखांकित किया और कांग्रेस की ऐतिहासिक नीतियों को भारत के लिए नुकसानदायक बताया। उनका पूरा भाषण आतंक के खिलाफ भारत के सख्त रुख का प्रतीक था।

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