1 अप्रैल से नए वित्तीय वर्ष की शुरुआत, बैंकिंग और GST में होंगे बड़े बदलाव
April 1, 2025 | by Nitesh Sharma

नई दिल्ली: वित्तीय वर्ष 2025-26 की शुरुआत आज, 1 अप्रैल से हो गई है, जिसके साथ कई अहम नियमों में बदलाव लागू हो गए हैं। इन बदलावों का सीधा असर आपकी जेब पर पड़ेगा। हर साल की तरह इस बार भी नए वित्तीय वर्ष में कई नीतिगत संशोधन किए गए हैं, जिनमें आयकर, जीएसटी, एलपीजी की कीमतें, बैंकिंग और यूपीआई पेमेंट से जुड़े नियम शामिल हैं।
क्या बदल रहा है?
1. बैंकिंग और मिनिमम बैलेंस नियम:
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अब सेविंग अकाउंट में मिनिमम बैलेंस बनाए रखना अनिवार्य होगा।
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बैलेंस न रखने पर बैंक जुर्माना लगा सकती हैं, हालांकि, यह सीमा हर बैंक के लिए अलग होगी।
2. डीमैट अकाउंट और यूपीआई नियम सख्त:
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सेबी ने डीमैट अकाउंट और म्यूचुअल फंड्स से जुड़े नियम सख्त कर दिए हैं।
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सभी निवेशकों को नॉमिनी और केवाईसी डिटेल्स अपडेट करनी होंगी, अन्यथा अकाउंट फ्रीज हो सकता है।
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एनपीसीआई (नेशनल पेमेंट कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया) ने ऐलान किया है कि 1 अप्रैल 2025 से उन मोबाइल नंबरों के यूपीआई ट्रांजेक्शन बंद कर दिए जाएंगे जो लंबे समय से इनएक्टिव हैं।
3. आधार-पैन लिंकिंग अनिवार्य:
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1 अप्रैल के बाद आधार और पैन लिंक न होने पर स्टॉक्स पर डिविडेंड नहीं मिलेगा।
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कैपिटल गेन पर टीडीएस कटौती बढ़ेगी और टैक्स रिफंड मिलने में अधिक समय लग सकता है।
छत्तीसगढ़ में सस्ती हुई शराब
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सरकार ने शराब तस्करी रोकने और राजस्व बढ़ाने के लिए शराब की कीमतों में 9.5% तक कटौती की है।
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प्रीमियम शराब की कीमत प्रति बोतल ₹80 से ₹300 तक कम हो गई है।
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बीयर की कीमतों में भी कटौती की गई है, और नई दरें बार और शराब दुकानों पर लागू होंगी।
4. यूपीआई सर्विस से जुड़ी जरूरी सूचना:
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बैंक अकाउंट से यूपीआई का उपयोग जारी रखने के लिए लिंक मोबाइल नंबर एक्टिव रखना जरूरी होगा।
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डिसकनेक्ट किए गए मोबाइल नंबरों को टेलीकॉम कंपनियां 90 दिन बाद नए ग्राहक को आवंटित कर सकती हैं, जिससे यूपीआई लेनदेन में परेशानी हो सकती है।
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बैंक और यूपीआई एप्स को हर हफ्ते अपडेट करने की सिफारिश की गई है ताकि डेटा सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।
क्या करें?
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यदि आपका बैंक अकाउंट किसी पुराने मोबाइल नंबर से लिंक है, तो उसे तुरंत अपडेट करें।
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अपने डीमैट अकाउंट की नॉमिनी और केवाईसी डिटेल्स अपडेट करें।
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आधार और पैन को लिंक करना अनिवार्य है, अन्यथा टैक्स से जुड़े लाभ नहीं मिल पाएंगे।
नए वित्तीय वर्ष में लागू इन बदलावों का असर वरिष्ठ नागरिकों, करदाताओं, व्यवसायों और आम उपभोक्ताओं पर पड़ेगा। सरकार का लक्ष्य अर्थव्यवस्था को गति देना और डिजिटल ट्रांजेक्शन को अधिक सुरक्षित बनाना है।
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