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चंडी माता मंदिर राजधानी रायपुर से 100 किलोमीटर दूर महासमुंद जिले है. ये मंदिर जंगल के किनारे घूंचापाली गांव में स्थित है.

April 4, 2023 | by livekhabar24x7.com

Bhupesh_Baghel

छत्तीसगढ़ में देवी मां की भक्ति का पर्व चैत्र नवरात्रि प्रारंभ हो गया है. श्रद्धालु नवरात्रि में रोजाना देवी मां के दर्शन के लिए मंदिरों तक पहुंच रहे हैं. लेकिन छत्तीसगढ़ में एक एक मंदिर है जिसकी चर्चा राज्य में ही नहीं बल्कि देशभर में होती है. वो है महासमुंद के जंगल के बीच स्थित चंडी माता मंदिर. इस मंदिर में देवी मां की आरती के समय जंगली भालू आ जाते है. पूजा के बाद प्रसाद खाते हैं फिर ये भालू जंगल में फिर लौट जाते हैं. इसे श्रद्धालु देवी मां का चमत्कार मानते हैं लेकिन इसकी असल सच्चाई क्या ये आज आपको बताते हैं.

देवी मां की आरती में पहुंचता है जंगली भालू

दरअसल चंडी माता मंदिर राजधानी रायपुर से 100 किलोमीटर दूर महासमुंद जिले है. ये मंदिर जंगल के किनारे घूंचापाली गांव में स्थित है. यहां देवी माता के दर्शन करने हजारों श्रद्धालु आते हैं. लेकिन यहां पहली बार आने वाले श्रद्धालु हैरान रह जाते हैं जब जंगली जानवर भालू का परिवार मंदिर परिसर में पहुंच जाता है. श्रद्धालु उसे आम जूस पिलाते हुए दिखते है. जो जंगली में खतरनाक जानवर माना जाता है वहीं मंदिर में श्रद्धालुओं के साथ मित्रता का मिशाल पेश करता है.

अबतक भालुओं ने किसी को नहीं पहुंचाया नुकसान

चैत्र नवरात्रि के पहले दिन भी मंदिर में भालुओं का परिवार मंदिर पहुंचा है. श्रद्धालु भालू को प्रसाद खिलाते और आम जूस पिलाते हुए नजर आए. स्थानीय लोगो का मानना है की ये देवी मां का चमत्कार है. इसके चलते पहले 8 -10 साल से भालू इसी तरह मंदिर में देवी मां के दर्शन के लिए आ जाते है. प्रसाद खाते है और वापस चले जाते है. वहीं ग्रामीणों ने ये भी बताया है कि आज तक किसी को भालुओं ने नुकसान नहीं पहुंचाया है. इन भालुओं से इंसानों को कोई खतरा महसूस नहीं होता है.

मंदिर परिसर में भालुओं का आना जाना लगा रहता है

वहीं मंदिर समिति की तरफ से भी इन भालुओं के आने जाने के लिए पूरी व्यवस्था मंदिर परिसर में किया गया है. जंगल से आने वाले रास्ते के ठीक सामने एक जालीदार बेरीकेट लगाया गया है. इससे श्रद्धालुओं को भी भालू से किसी भी प्रकार के खतरें को कम करने की कोशिश की गई है. मंदिर के पुजारियों ने बताया है कि मंदिर में 5 भालू आते थे, लेकिन एक भालू की मौत होने के बाद अब 4 भालू आते है. वो महीने में कुछ ही दिन भालू मंदिर आते है.

भालू के पास जाने पर कर सकता है अटैक

इधर वाइल्ड लाइफ एक्सपर्ट संदीप पौराणिक ने इसे देवी चमत्कार मानने से साफ इंकार कर दिया है. उन्होंने इसे गतिविधि को इंसानों के लिए बहुत खतरनाक माना है. एक्सपर्ट में एबीपी न्यूज से बातचीत करते हुए कहा कि भालू को प्राकृतिक फूड खिलाना चाहिए. उसको कोल्ड ड्रिंक्स पिलाने से स्वास्थ्य की हानि होगी. आगे चलकर भालू को मानसिक परेशानी हो सकता है. कोल्ड ड्रिंक्स के बैगर अब श्रद्धालु भालू के पास जाते हैं तो उसपर अटैक कर सकता है. भालू में देवी से कोई श्रद्धा भाव नहीं है. जंगल में फूड के लिए जंगली जानवरों को बड़ा संघर्ष है इसलिए मंदिर आता है.

मादा भालू के बच्चे के पास जाना बहुत ज्यादा खतरनाक है

संदीप पौराणिक ने इस परंपरा को तुरंत बंद करने की सलाह देते हुए बताया कि मंदिर में मादा भालू अपने अपने बच्चो के साथ आती है. श्रद्धालु अगर उसके बच्चे के आस पास जाते है तो मादा भालू श्रद्धालुओं पर अटैक कर सकती है. मादा भालू को ये बिलकुल पसंद नहीं होता है कि उसके बच्चे के आस पास कोई आए. जंगल टाइगर को सबसे खतरनाक माना जाता है. लेकिन भालू तो टाइगर और हाथी से भी भीड़ जाता है. क्योंकि टाइगर एक शिकार के बाद रुक जाता है लेकिन भालू लगातार शिकार कर सकता है. ओड़िशा में एक साथ भालू ने 7 लोगों को मार डाला था.

टाइगर से भी खतरनाक हो सकते हैं जंगली भालू

एक्सपर्ट ने उदाहरण के साथ बताया कि अगर टाइगर राइट में चल रहा है और आप लेफ्ट में है तो वो आदमखोर और भूखा नहीं होगा तो आपका शिकार नहीं करेगा. लेकिन इस कंडीशन में भालू हो तो आपका शिकार कर लेगा. हालांकि भालू आदमखोर नहीं होता लेकिन बहुत खतरनाक जानवर है. वहीं एक्सपर्ट ने ये भी बताया कि भालू के बड़े बड़े पंजे होते हैं दीमक खाता है. शहद खाता है. अगर वो अपना नेचुरल फूड खाना भूल जाएगा तो लोगों की मुसीबत बढ़ जाएगी और मानव भालू संघर्ष बढ़ने का खतरा बढ़ जाएगा.

मंदिर में पहले साधु संत करते थे तंत्र साधना

गौरतलब है कि चंडी माता मंदिर 150 साल पुराना है.  मंदिर को लेकर ग्रामीणों का कहना है कि ये यहां चंडी माता की प्रतिमा प्राकृतिक है. माता के इस मंदिर में पहले तंत्र साधना के लिए जाना जाता था. यहां कई साधु संत का डेरा लगा रहता था. इसे तंत्र साधना के लिए गुप्त रखा गया था लेकिन 1950 के आस पास इस मंदिर को आम नागरिकों के लिए खोला गया है. इस मंदिर में प्राकृतिक रूप से बनी 23 फिट ऊंची दक्षिण मुखी प्रतिमा है.

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