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CG Breaking News: शराब घोटाले में ED ने पूर्व मंत्री कवासी लखमा और बेटे हरीश को किया गिरफ्तार

January 15, 2025 | by Nitesh Sharma

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LIvekhabhar | Chhattisgarh News

CG Liquor Scam: रायपुर। छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित 2000 करोड़ रुपये के शराब घोटाले (Chhattisgarh Liquor Scam) में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने आज तीसरी बार पूर्व आबकारी मंत्री कवासी लखमा और उनके बेटे हरीश लखमा को पूछताछ के लिए बुलाया। ताजा जानकारी के अनुसार, पूछताछ के बाद ईडी ने कवासी लखमा को गिरफ्तार कर लिया है। जल्द ही उन्हें कोर्ट में पेश किया जाएगा।

मामले की पृष्ठभूमि
इस घोटाले में 28 दिसंबर को ED ने पूर्व मंत्री कवासी लखमा और उनके बेटे हरीश के ठिकानों पर छापेमारी की थी। छापों के दौरान नकद लेनदेन से जुड़े अहम सबूत मिलने का दावा किया गया। इसके बाद 3 जनवरी को पूछताछ के बाद दोनों को रिहा कर दिया गया था।

क्या है छत्तीसगढ़ का शराब घोटाला?
दिल्ली की तीस हजारी कोर्ट में 11 मई 2022 को आयकर विभाग ने पूर्व IAS अधिकारी अनिल टुटेजा, उनके बेटे यश टुटेजा, और सौम्या चौरसिया के खिलाफ याचिका दायर की थी। इसमें आरोप लगाया गया कि छत्तीसगढ़ में रिश्वत और अवैध वसूली का बड़ा खेल चल रहा है। मामले में महापौर एजाज ढेबर के भाई अनवर ढेबर को भी आरोपी बनाया गया।

इसके बाद 18 नवंबर 2022 को ईडी ने इस घोटाले में PMLA एक्ट के तहत मामला दर्ज किया। अब तक 2161 करोड़ रुपये के घोटाले का खुलासा चार्जशीट में किया गया है।

CG Breaking News : कैसे हुआ घोटाला?
ईडी की चार्जशीट के मुताबिक, 2017 में आबकारी नीति में संशोधन कर CSMCL (छत्तीसगढ़ स्टेट मार्केटिंग कॉर्पोरेशन लिमिटेड) के माध्यम से शराब बिक्री का प्रावधान किया गया। लेकिन 2019 के बाद घोटाले के मुख्य आरोपी अनवर ढेबर ने अरुणपति त्रिपाठी को CSMCL का प्रबंध निदेशक (MD) नियुक्त करवाया। इसके बाद अधिकारियों, व्यापारियों और राजनीतिक रसूख वाले व्यक्तियों के सिंडिकेट के माध्यम से भ्रष्टाचार को अंजाम दिया गया।

अरुणपति त्रिपाठी, जो CSMCL के MD थे, ने मनपसंद डिस्टिलर की शराब को परमिट जारी किया। देसी शराब की एक पेटी पर 75 रुपये कमीशन लिया जाता था। इस कमीशन का रिकॉर्ड एक्सेल शीट में तैयार कर अनवर ढेबर को भेजा जाता था।

अन्य प्रमुख आरोप

  • नकली होलोग्राम का उपयोग कर अवैध शराब बेची गई।
  • CSMCL की दुकानों में केवल तीन ग्रुप की शराब की बिक्री होती थी:
    • केडिया ग्रुप: 52%
    • भाटिया ग्रुप: 30%
    • वेलकम ग्रुप: 18%
      इससे राज्य के राजस्व को भारी नुकसान हुआ।

यह मामला राजनीतिक और प्रशासनिक भ्रष्टाचार का बड़ा उदाहरण बनकर उभरा है, जिसमें कई हाई-प्रोफाइल नाम जुड़े हुए हैं।

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