CG Political : धान खरीदी पर रार! मंत्री अकबर ने अरुण साव के बयान पर किया पलटवार

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रायपुर। CG Political : छत्तीसगढ़ विधानसभा चुनाव नजदीक है, ऐसे में पक्ष -विपक्ष में आरोप प्रत्यारोप का सिलसिला जारी है। हाल में भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष अरुण साव ने धान खरीदी को लेकर कांग्रेस सरकार पर निशाना साधते हुए कहा था कि आप जो धान खरीदते हैं उसका पूरा चावल भारत सरकार खरीदती है,

और भारत सरकार आपको पैसा देती है, इसलिए झूठ-भ्रम फैलाने की आवश्यकता नहीं है। भारत सरकार आज 2183 रुपए आपको धान के बदले देती है, और जो समर्थन मूल्य बढ़ा है, आप उसका भी लाभ किसानों को नहीं दे रहे थे, जेब में डाल रहे थे।

CG Political : जिसके बाद आज कैबिनेट और वरिष्ठ मंत्री मोहम्मद अकबर ने आज अपने सरकारी आवास में प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित की। जिसमें उन्होंने प्रदेश अध्यक्ष अरुण साव के सवालों का जवाब दिया है। प्रेस कॉन्फ्रेंस में मंत्री अकबर ने कहा कि भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष अरुण साव को धान खरीदी के पूरे सिस्टम के बारे में कुछ भी जानकारी नहीं है इसलिए ये बार-बार बयान देते हैं कि धान की खरीदी केन्द्र सरकार द्वारा की जाती है। वह पहली फुरसत में धान खरीदी के पूरे सिस्टम को समझें।

समर्थन मूल्य पर धान खरीदी के बारे में मंत्री अकबर ने बताया कि धान खरीदी राज्य सरकार की सबसे बड़ी योजना है। धान खरीदी के लिए राज्य सरकार प्रतिवर्ष 20 से 25 हजार करोड़ का ऋण लेती है। यह ऋण छत्तीसगढ़ राज्य सहकारी विपणन संघ (मार्कफेड) के माध्यम से बैंकों और नाबार्ड इत्यादि से लिया जाता है।

धान खरीदी के लिए केन्द्र सरकार द्वारा छत्तीसगढ़ सरकार को कोई सहायता नहीं दी जाती और न ही कोई अनुदान या ऋण दिया जाता है। बैंकों एवं नाबार्ड से ऋण राज्य सरकार 1 की गारंटी पर दिया जाता है। पूरे देश में छत्तीसगढ़ एकमात्र ऐसा राज्य है जहां कांग्रेस की सरकार बनने के बाद से किसानों को प्रति क्विंटल धान की कीमत 2500 रूपये प्रति क्विंटल से देने की शुरूआत हुई थी।

मंत्री अकबर ने आगे कहा कि कांग्रेस ने 2500 रूपये प्रति क्विंटल धान का मूल्य देने का जो वादा किया था उसे निभाकर अपने वायदे से अधिक राशि राज्य सरकार किसानों को प्रदान कर रही हैं। छत्तीसगढ़ के अन्नदाता किसानों को 2500 रू. प्रति क्विटल की दर से धान का भुगतान करने से रोकने के लिए भाजपा ने रोड़े अटकाने में कोई कमी नहीं की।

समर्थन मूल्य से अधिक दर पर किसानों को भुगतान करने पर छत्तीसगढ़ सरकार से सेंट्रल पूल में जमा किया जाने वाला चावल नहीं लेने का पत्र केन्द्र सरकार द्वारा भेज दिया गया। इसे देखते हुए मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के नेतृत्व में यह निर्णय लिया गया कि किसानों को 2500 रू. प्रति क्विंटल दर से राशि का भुगतान करने के लिए अंतर की राशि के भुगतान के लिए राजीव गांधी किसान न्याय योजना के तहत अलग से राशि प्रदान की जाए।

सहकारी समितियों में धान बेचने वाले किसानों को समर्थन मूल्य के अलावा 9000 रूपये प्रति एकड़ की दर से 04 किस्तों में प्रदान किया जा रहा है। वर्ष 2022-23 में समर्थन मूल्य पर धान बेचने वाले किसानों को राजीव गांधी किसान न्याय योजना की राशि मिलाकर प्रति क्विंटल 2640 रू. की दर से भुगतान प्राप्त होगा।

मंत्री मोहम्मद अकबर ने बताया कि राज्य सरकार ने धान उत्पादक किसानों के लिए सेवा सहकारी समितियों की संख्या 1333 से बढ़ाकर 2058 कर दी है। धान बेचने वाले किसानों को धान की राशि का चेक छत्तीसगढ़ सरकार के सहकारिता विभाग के अंतर्गत आने वाली सहकारी समितियों के माध्यम से दिया जाता है। धान बेचने वाले किसानों का पंजीयन छत्तीसगढ़ सरकार के छत्तीसगढ़ एकीकृत किसान पोर्टल में किया जाता है न कि केन्द्र सरकार के किसी पोर्टल में केन्द्र सरकार की कोई भी संस्था यहां आकर चेक प्रदान नहीं करती है।

मंत्री मोहम्मद अकबर ने बताया कि राज्य सरकार द्वारा धान उत्पादक किसानों को दिये जा रहे प्रोत्साहन के फलस्वरूप धान बेचने वाले पंजीकृत किसानों की संख्या तथा धान का रकबा लगातार बढ़ता जा रहा है। साथ ही किसानों द्वारा बेचे जाने वाले धान की मात्रा भी लगातार बढ़ती जा रही है। उन्होंने बताया कि धान बेचने वाले पंजीकृत किसानों की संख्या 16.96 लाख से बढ़कर 29.97 लाख हो गई है।

धान का रकबा 24 लाख हेक्टेयर से बढ़कर 32 लाख हो गया है। उन्होंने बताया कि वर्ष 2021-22 में 92 लाख मीट्रिक टन, वर्ष 2022-23 में 107 लाख मीट्रिक टन धान की खरीदी की गई। वर्ष 2023-24 में 125 लाख मीट्रिक टन धान खरीदी का अनुमान है। मंत्री मोहम्मद अकबर ने बताया कि किसानों से अब तक 15 क्विंटल प्रति एकड़ की दर से धान खरीदी की जा रही थी जिसे राज्य सरकार ने बढ़ाकर 20 क्विंटल प्रति एकड़ धान खरीदने का निर्णय लिया है। धान खरीदी के ऋण का भुगतान करती है राज्य सरकार

मंत्री अकबर ने जानकारी दी कि राज्य सरकार जो धान खरीदती है उसका परिवहन कराकर राईस मिलों के माध्यम से कस्टम मिलिंग का कार्य कराती है तथा कस्टम मिलिंग के बाद जो चावल प्राप्त होता है। उसे भारतीय खाद्य निगम (एफ.सी.आई.) के साथ •साथ नागरिक आपूर्ति निगम में जमा कराती है भाजपा – के प्रदेश अध्यक्ष अरुण साव को मैं यह बताना चाहूंगा कि राज्य सरकार जो चावल एफ.सी.आई. व आपूर्ति निगम में जमा कराती है उसका ही भुगतान केन्द्र सरकार से प्राप्त होता है। धान खरीदने के लिए कोई राशि प्राप्त नहीं होती। इसी तरह राज्य सरकार धान खरीदते समय बैंकों एवं अन्य संस्थाओं से जो ऋण लेती है उसका मूलधन व ब्याज की राशि भी राज्य सरकार ही जमा करती है।

मंत्री मोहम्मद अकबर ने जानकारी दी कि वर्ष 2022-23 में राज्य सरकार ने कुल 19209 करोड़ रूपये का ऋण धान खरीदी के लिए लिया था। एन.सी.डी.सी. से 8500 करोड़, नाबार्ड से 4000 करोड़ इंडियन बैंक से 1599 करोड़ पंजाब नेशनल बैंक से 1110 करोड़ बैंक आफ इंडिया से 2000 करोड़, बैंक ऑफ बड़ौदा से 2000 करोड़ रूपये का ऋण लिया गया था।


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