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एफ. आर. के. खरीदी के टेंडर में भारी गड़बड़ी, छोटे उद्योगपतियों के साथ हो रहा अन्याय…

December 5, 2023 | by livekhabar24x7.com

रायपुर। छत्तीसगढ़ के कई एफ. आर. के. निर्माता एवं छोटे उद्योगपतियों की ओर से आज श्रवण कुमार अग्रवाल ने रायपुर में प्रेस वार्ता को सम्बोधित किया। इस दौरान उन्होंने बताया कि सरकारी कंपनी NAFED सभी शासकीय नियमों और कानून को ताक में रखकर अपने एकाधिकार का फायदा उठा रहे हैं। और छ.ग. राज्य के नव प्रवेशी छोटे एफ.आर के. निर्माता और छोटे उद्योगपतियों का हक छीनकर उनका भविष्य अंधकार में धकेलने का प्रयास कर रहे है।

इस मामले पर श्रवण कुमार ने बताया कि, NAFED सरकार के सहकारिता मंत्रालय के अधीन की संस्था हैं। नाफेड अगर कोई भी काम करता है तो सेंट्रल विजलेंस कमीशन के गाइडलाइन्स का पालन करना होता हैं ,लेकिन हाल ही में देखा गया कि नफेड ने जो एफ.आर.के. खरीदी के टेंडर जारी किए थे। इसमें व्यापारियों को मात्र 2 वर्किंग दिनों का समय दिया गया। इस टेंडर में कई प्रकार की विसंगति हैं। सीवीसी की गाइडलाइन्स कहती है कि अगर आप सरकारी खरीदी करते हैं तो इसके लिए कम से कम 21 दिनों का समय देना चाहिए। लेकिन इन्होने 5 वर्किंग दिवस का भी समय नहीं दिया। 2 दिन के अंदर ही टेंडर जारी कर दिया।

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इतना ही नहीं कई और मनमाने नियमों को थोप दिया गया हैं। ऐसी ऐसी शर्ते लागू की है कि पूरे देशभर के किसी राज्य में यहां तक के स्वयं नफेड ने कभी भी ये शर्ते लागू नहीं किए, और छत्तीसगढ़ में ऐसे कर रहे हैं। उन्होंने आगे कहा कि एफ आर के के बड़े-बड़े व्यापारी नफेड से साथ-गाठ कर कीमत को बढ़ाने का प्रयास कर रहे हैं। इससे स्पष्ट है कि इसमें भारी अनिमितता की जा रही हैं। इससे केंद्र सरकार को करोड़ो रुपये की क्षति हो रही।

Livekhbar24x7 के संवाददाता को उन्होंने बताया कि इसमें लगभग 500 करोड़ की गड़बड़ी हुई हैं। उन्होंने कहा कि हम इस मुद्दे को लगतार उठाते रहेंगे और जिस-जिस फर्म में न्याय मिलाने की उम्मीद रहेगी वहा जाएंगे। उन्होंने हाईकोर्ट में शिकायत करने की भी बात कही। साथ ही उन्होने कहा कि प्रदेश में राजनितिक बदवाल हुए हैं तो हम दिग्गज नेताओं से मुलाकात कर उनसे सहयोग करने की अपील कर रहे हैं कि टेंडर को निरस्त करे।

क्या हैं एफ.आर. के. ?
दरअसल फोर्टीफाइड राइस कर्नेल जिसे संक्षेप में एफ.आर. के. कहा जाता है इसका निर्माण चावल या चावल के टुकड़ों को पीसकर उसमें तय मात्रा में विटामिन एवं मिनरल्स मिलाकर मशीनों के माध्यम से उसे पुनः चावल का रूप दिया जाता है। इस एफ.आर. के. को सादे चावल के साथ 1% मिश्रित कर भोजन के रूप में उपयोग किया जाता है जिससे कुपोषण से मुक्ति एवं मानव शरीर में विटामिन मिनरल्स की कमी की पूर्ति की जा सकती है।

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