नई दिल्ली। Fact : हिंदू धर्म में हर घटनाक्रमों का जिक्र किया जाता हैं। वहीं इसको लेकर कई नियम भी बनाए गए हैं। हिंदी धर्म में अंतिम संस्कार को लेकर कई मान्यताएं हैं। इसके लिए बहुत से नियम बनाए गए है। इनमें से कुछ नियम मृतक के लिए हैं, जबकि कुछ मृतक के परिवार के सदस्यों के लिए हैं। इनमें से एक नियम बाल दान करने से संबंधित है।
बता दे कि यदि परिवार के किसी सदस्य की मृत्यु हो जाती है, तो परिजन (पुरुष वर्ग) के सिर मुंडवाने की प्रथा है यह अदि काल से चली आ रही है। जिसका उल्लेख पौराणिक कथा में भी मिलता है। आज हम जानेगे की बाल दान करने के पीछे का क्या कारण है।
Fact : बता दे कि मृत्यु के बाद मृत व्यक्ति के शरीर के आसपास बहुत से हानिकारक बैक्टीरिया जन्म ले लेते हैं। शव को श्मशान तक ले जाने तक घर के सदस्य बहुत बार शव के संपर्क में आते हैं। ऐसी परिस्थितियों में अन्य व्यक्तियों के लिए मृत व्यक्ति को बैक्टीरिया का सामना करना पढ़ सकता है। नतीजतन, इन जीवाणुओं को खत्म करने के लिए अंतिम संस्कार के बाद विभिन्न नियम स्थापित किए गए हैं, जिनमें नाखून काटना, सूरज की रोशनी में खुद को उजागर करना और स्नान करना शामिल है।
Fact : वहीं इन उपायों में से एक में सिर मुंडवाना भी शामिल है। मृतक ने अपने पूरे जीवनकाल में परिवार के लिए हर तरीके से सहयोग किया होगा। परिणामस्वरूप, व्यक्ति के निधन के बाद पूरा परिवार इन योगदानों के प्रति अपना भाव व्यतीत करता है। परिजन के सिर मुंडवाने की प्रथा कई वर्षों से चली आ रही है। मृतक को अपने बाल चढ़ाना उनके प्रति प्यार और सम्मान का भाव प्रकट करना माना जाता है।