हसदेव असंख्य जीव, जंतुओं का घर है… उसका विनाश, प्रकृति कभी माफ नहीं करने वाली
December 26, 2023 | by livekhabar24x7.com
हसदेव। परसा ईस्ट केते खुली खदान (हसदेव अरण्य) के जंगलों में काट रहे आरा मशीन की गूंज जंगलों से निकलकर राजधानी रायपुर पहुंच गई है। राजधानी रायपुर पहुंचते-पहुंचते आरा मशीनों की आवाज राजनीतिक रंग में रंग गई।
पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी की जयंती सुशासन दिवस के अवसर पर हसदेव की जंगलों की कटाई के विरोध में बाबा साहब भीमराव अंबेडकर चौके में मानव श्रृंखला बनाकर हसदेव बचाओ की गुहार लगाई गई। इस दौरान सैकड़ों कार्यकर्ता साथ रहे। जो हसदेव बचाओ के तखती लिये हुये थे।
इस संदर्भ में विकास उपाध्याय ने जानकारी देते हुए कहा-हसदेव के कट रहे जंगलों के लिए प्रदेश सरकार जिम्मेदार है। लगातार हसदेव के पेड़ काटे जा रहे हैं। लोगों को नजरबंद किये जा रहे हैं। जो बरदाश्त नहीं किये जाएंगे। देश में आज डबल इंजन की सरकार है। आरोप-प्रत्यारोप लगाना बंद करे। और जंगलों को उजाड़ना बंद करे।
पिछले लंबे समय से आदिवासी हसदेव अरण्य को बचाने अनिश्चितकालीन हड़ताल कर रहे हैं। जिसके बाद 21 दिसंबर से ग्रामीणों को पुलिसिया डंडे का शिकार बनाकर अंधाधुंध पेड़ों की कटाई की जा रही है। विरोध कर रहे लोगों को नजरबंद किये गये हैं। जिससे ग्रामीणों में भारी आक्रोश दिख रहा है। जो कम होने का नाम नहीं ले रहा है।
वहीं हसदेव अरण्य बचाओ संघर्ष समिति के सदस्य आलोक शुक्ला ने ट्वीट करते हुये लिखा है। विधानसभा में कांग्रेस और भाजपा दोनों दलों ने मिलकर संकल्प पारित किया था। हसदेव अरण्य को खनन मुक्त रखा जाए। पांचवी अनुसूचित क्षेत्रों की संवैधानिक ग्रामसभाओं ने भी कोयला खनन का विरोध किया है। विधानसभा के संकल्प और ग्रामसभा के निर्णय पर खनन परियोजना निरस्त हो।
आलोक शुक्ला ने अपने अगले ट्वीट में लिखा है। ये विनाश सिर्फ एक पूंजीपति अडानी की जिद के लिए किया जा रहा है। जो हसदेव से ही कोयला निकालकर मुनाफा कमाना चाहता है। जो हसदेव असंख्य जीव, जंतुओं का घर है, हमारी सांसें जिससे चलती हैं, उसका ऐसा विनाश, प्रकृति कभी माफ नहीं करने वाली है।
RELATED POSTS
View all