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कानून अब ‘अंधा’ नहीं! न्याय की देवी की आंखों से हटाई गई काली पट्टी, हाथ में तलवार की जगह थमाया गया संविधान

October 17, 2024 | by Nitesh Sharma

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LIvekhabhar | Chhattisgarh News

नई दिल्ली। कानून अब अंधा नहीं है!  सुप्रीम कोर्ट में बदलाव हुआ है न्याय की देवी की आंखों की पट्टी हट गई है और इसके अलावा उसके हाथ से तलवार भी हटा दी गई है। अब न्याय की देवी के एक हाथ में तराजू और दूसरे हाथ में पुस्तक है जो संविधान जैसी दिखती है। इसके अलावा एक और बड़ा बदलाव हुआ है दशहरे की छुट्टियों में सुप्रीम कोर्ट के सामने तिलक मार्ग पर एक बड़ी वीडियो वॉल लग गई है जिसमें हर समय सुप्रीम कोर्ट की जस्टिस क्लॉक चलती है जिससे सुप्रीम कोर्ट में मुकदमों की रियल टाइम जानकारी जानी जा सकती है।

आंखों पर पट्टी और हाथ में तलवार का क्या है अर्थ
‘न्याय की देवी’ की नई मूर्ति चीफ जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ की पहल पर लगाई गई है। पुरानी मूर्ति में कानून की देवी की आंखों में जो पट्टी बंधी थी और हाथ में जो तलवार था उसका एक खास अर्थ था। आंखों पर बंधी पट्टी न्याय व्यवस्था में समानता को दर्शाती है। इसका मतलब है कि चाहे अमीर हों या गरीब, ताकतवर हों या निर्बल कानून की नजर में सब बराबर हैं।

इसका मतलब है अदालतें अपने सामने आने वाले सभी फरियादियों और वादियों की संपत्ति, शक्ति, जाति-धर्म, लिंगभेद, रंगभेद या किसी अन्य सामाजिक स्थिति के आधार पर फैसला नहीं करती हैं. न्याय की देवी के हाथ में तलवार होने का मतलब था कि दोषियों को दंडित करने की शक्ति भी कानून के पास है.

LIvekhabhar | Chhattisgarh News

क्या है नई मूर्ति में खासियत
1. जजों की लाइब्रेरी में जो न्याय की देवी की नई मूर्ति लगी है वो सफेद रंग की है.

2. नई मूर्ति के कपड़े में भी बदलाव किया गया है. भारतीय परिधान साड़ी पहनी हुई नई मूर्ति है.

3. मूर्ति के सिर पर एक मुकुट भी है. जिस तरह पौराणिक कथाओं में देवियों के सिर पर मुकुट होने का वर्णन किया जाता है.

4. नई मूर्ति की माथे पर बिंदी लगी है. आभूषण भी नहीं मूर्ति को पहनाया गया है.

5. नई मूर्ति के एक हाथ में पहले की तरह तराजू है, लेकिन दूसरे हाथ में तलवार की जगह संविधान है.

6. मूर्ति के एक हाथ में जो तराजू है वह यह दिखाता है कि कोर्ट किसी भी फैसले पर पहुंचने से पहले दोनों पक्षों की बात को ध्यान से सुनता है. तराजू संतुलन का प्रतीक है.

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