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ISRO प्रमुख वी. नारायणन बोले – ‘विकसित भारत 2047’ में अंतरिक्ष तकनीक का होगा बड़ा योगदान
August 22, 2025 | by Nitesh Sharma
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August 22, 2025 | by Nitesh Sharma
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August 20, 2025 | by Nitesh Sharma
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August 20, 2025 | by Nitesh Sharma
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August 20, 2025 | by Nitesh Sharma
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August 19, 2025 | by Nitesh Sharma
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August 12, 2025 | by Nitesh Sharma

नई दिल्ली। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के अध्यक्ष वी. नारायणन ने शुक्रवार को राष्ट्रीय मीट 2025 के उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए कहा कि अंतरिक्ष अनुप्रयोगों का विस्तार अब सीधे नागरिकों को लाभान्वित कर रहा है। इसे उन्होंने जमीनी स्तर तक विज्ञान पहुँचाने की दिशा में एक “ऐतिहासिक कदम” बताया।
नारायणन ने कहा, “आज टेलीविजन प्रसारण से लेकर मौसम पूर्वानुमान तक, 55 अंतरिक्ष अनुप्रयोग भारत के हर नागरिक की सुरक्षा और सुविधा सुनिश्चित कर रहे हैं। यह हमारी यात्रा का एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है।”
50 साल की उपलब्धियां
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50 वर्ष पहले भारत के पास उपग्रह तकनीक नहीं थी, लेकिन आज भारत दुनिया की अग्रणी अंतरिक्ष शक्तियों में खड़ा है।
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30 जून को प्रक्षेपित NISAR (नासा–इसरो सिंथेटिक अपर्चर रडार) सैटेलाइट को उन्होंने “दुनिया का सबसे महंगा उपग्रह” बताया। यह पूरा उपग्रह इसरो द्वारा निर्मित और भारतीय रॉकेट से कक्षा में स्थापित किया गया।
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29 जनवरी 2025 को इसरो ने अपना 100वां रॉकेट सफलतापूर्वक लॉन्च किया।
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इस साल भारत उन चार देशों में शामिल हुआ, जिन्होंने कक्षा में दो उपग्रहों को डॉक और अनडॉक किया।
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के निर्देशन में ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला को अंतरिक्ष में भेजा गया। वह अंतर्राष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (ISS) से लौटने वाले पहले भारतीय गगनयात्री बने।
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आज चंद्रमा की कक्षा में दुनिया का “सबसे बेहतरीन कैमरा” भारत का है।
भविष्य की दिशा
इसरो प्रमुख ने कहा कि संगठन निरंतर सुधार की प्रक्रिया को अपनाएगा ताकि परिचालन अनुप्रयोग अधिक सटीक, लगातार और उपयोगकर्ता-उत्तरदायी बन सकें। उन्होंने कहा कि इसके लिए निजी क्षेत्र के संसाधनों का भी उपयोग किया जाएगा।
“हम स्वतंत्रता के 100 वर्ष पूरे होने से पहले भारत को विकसित देश बनाने के लिए ‘विकसित भारत 2047’ में योगदान देने जा रहे हैं।” – वी. नारायणन
तेज़ी से बढ़ते मिशन
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2005–2015 के बीच लॉन्च हुए मिशनों की तुलना में, 2015–2025 के बीच मिशनों की संख्या लगभग दोगुनी रही है।
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पिछले छह महीनों में तीन बड़े मिशन पूरे किए गए हैं।
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एक्सिओम-4 मिशन को उन्होंने “बेहद प्रतिष्ठित मिशन” बताया।