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SC ने पतंजलि के भ्रामक विज्ञापन पर दिखाई सख्ती, अवमानना का भेजा नोटिस, केंद्र सरकार को कहा – अपनी आंखें बंद करके बैठना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है

February 27, 2024 | by livekhabar24x7.com

 

नई दिल्ली। भारत में सबसे बड़ा हिस्सा भ्रामक विज्ञापनों का है। कभी सेरोगेसी तो कभी डिसेप्टिव एड का इस्तेमाल जारी था। अब सुप्रीम कोर्ट ने बाबा रामदेव और बालकृष्ण के मशहूर ब्रांड पतंजलि के भ्रामक विज्ञापन मामलें में अवमानना का नोटिस जारी किया है। कोर्ट रने बीमारियों के इलाज पर भ्रामक विज्ञापनों पर जवाब मांगा है। कोर्ट ने पूछा है क‍ि क्यों ना उनके खिलाफ कार्रवाई की जाए। सुप्रीम कोर्ट ने विज्ञापनों में छपे फोटो के आधार पर नोट‍िस जारी क‍िया है।

केंद्र सरकार फिर सुप्रीम कोर्ट की टिपण्णी

सर्वोच्च न्यायलय ने केंद्र सरकार को भी भ्रामक विज्ञापन मामलें में घेरा है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा देश को ऐसे विज्ञापनों के जरिए घुमाया जा रहा है और केंद्र सरकार अपनी आंखें बंद करके बैठी है। ये बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है। कोर्ट ने कहा क‍ि सरकार को तत्काल कुछ कार्रवाई करनी होगी। सुप्रीम कोर्ट ने पतंजलि आयुर्वेद के डायरेक्टर को कारण बताओ नोटिस जारी किया है और पूछा है क‍ि क्यों न उनके खिलाफ कोर्ट की अवमनाना का मुकदमा चलाया जाए। कोर्ट ने इस मामले में तीन हफ्ते में जवाब मांगा है। सुप्रीम कोर्ट ने पतंजल‍ि के मेडिकल प्रोडकट्स के विज्ञापन पर रोक लगाई है, जो रोगों को ठीक करने का दावा करते है। सुप्रीम कोर्ट ने केन्द्र सरकार को तीन हफ्ते में जवाब देना है क‍ि उन्होंने क्या करवाई की है।

आज से कोई भ्रामक एड नहीं देंगे : SC

सुप्रीम कोर्ट ने कहा है क‍ि पतंजल‍ि आयुर्वेद के व‍िज्ञापनों में परमानेंट रिलीफ शब्द ही अपने आप में भ्रामक है और कानून का उल्लंघन है। कोर्ट ने कहा क‍ि आज से आप कोई भ्रामक विज्ञापन नहीं देंगे और न ही प्रिंट या इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में ऐसे व‍िज्ञापन देंगे। सुप्रीम कोर्ट ने कहा क‍ि आपने एलोपैथी पर कमेंट कैसे किया, जब हमनें माना किया था? इस पर पतंजलि ने कोर्ट को बताया क‍ि हमनें 50 करोड़ का एक रिसर्च लैब बनाया है। इस पर कोर्ट ने पतंजल‍ि को कहा है क‍ि आप केवल साधारण एड दे सकते हैं।

केंद्र सरकार – नहीं करेंगे भ्रामक व‍िज्ञापन बर्दाश्‍त

सुप्रीम कोर्ट ने कहा क‍ि हम दो लोगों को पक्षकार बनाएंगे, जिनकी तस्वीर व‍िज्ञापन पर हैं। उन्हें नोटिस जारी करेंगे। उन्हें अपना जवाब व्यक्तिगत दाखिल करना होगा। कोर्ट ने कहा क‍ि हम ये जानना नहीं चाहते कौन क्या है? हम पक्षकार बनाएंगे। केन्द्र सरकार ने कहा क‍ि हम किसी भी तरह का भ्रामक विज्ञापन बर्दाश्त नहीं करेंगे, चाहे कोई भी हो।

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